شعر " عروس تعریفی " با کسب اجازه از استاد عندلیب
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« عروس تعریفی » |
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هِشْکَه تویِ شَاْرْ اِمرو قدرِما نِمِاْدُاْنه |
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گَندهیِ به جُاْنِ تو اَویُاْنِ درِ خُاْنه |
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وَر چِنگِ دماغِ خُوْ ما رَ اَاْوِزُ دَاْره |
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از بچّة ریقُاْنه تا عزیزِ دُرْدُاْنه |
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با اِی که دم و بیدم، از مرد و زنِ عَاْلَم |
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هر کسِ که درمُاْنه وَرْ اُلَنگِ ما رُاْنه |
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مستِ سینه چاکِم ما، از عشقْ هلاکِمْ ما |
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گنجِ زیرِ خاکِم ما، در گوشة ویرُاْنه |
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دیوُاْنة عشقِم ما، بیزارْ ز هُشیَاْری |
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تا فکرِ کُنَه هشیار وَرْ اَو زده دیوُاْنَه |
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مرغِ باغِ عشقِم ما، در بهشتْ دَاْرِم جا |
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کُنجِ اِی قَفسْ امّا، مُاْتاجِ اَو و دُاْنه |
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چُو مِاْخِ زرینِم ما، صد گَزْ دَ زَمینِمْ ما |
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از کینة بَدکَاْرا، از غصّة بیچَاْرا |
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هر کسِ نِمِاْدُاْنَه جُزْ اَاْدَمِ فرزُاْنَه |
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شَلْتَه خورده جُاْمِ دلْ، وَر شَریده پیمُاْنَه |
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خوش خوردنِ شَفتَاْلو پَس دَاْدَنِ بَد دَاْره |
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بَس جوابِ ما رَاْده او که دلْ مِلَرزُاْنَه |
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بد کرده یِ اِی دنیا، بد مِبینه او دنیا |
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او که خربزه کِشته وَر نِدَاْره هِندُاْنَه |
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تا کُلِ کلیدُاْنِ جُاْنِ مُوْ خِزِ گُربه |
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در رقص مِیَاْ او که هی گُربه مِرَقصُاْنَه |
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چُو مِاْخِ دَ دیوارِ دردِ مَردُمُوْ اِمرو |
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دلْ ما همگی خونَاْ، او بُر خُوْ مِلکُّاْنَه |
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گر بُو همه جا تَاْریکْ تنها پَیِ درْ روشَه |
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مَاْکُوْ مُوجْ جُاْنِ مُوْ خودْ دورة وَر بُاْنَه |
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اِی دوره یِ دلْ خَواْره، اَو کُنَه بُرا زَاْره |
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سقفِ زندگیرْ اَاْخِر اِی دوره هُتُنْبُاْنه |
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جنگِ زرگَرُاْنَاْیَه، قدِّ ما کَمُاْنَاْیَه |
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در خُاْنه نِیَاْ چیزِ بیبی اَ مَلِک مُاْنَه |
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وقتِ خوردنِ نِسْتَه، مَاْیِمْ چه کُنِمْ پسته |
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عَاْجِزْ چه کُنَه اَینَه، کَلْ مَاْ چه کُنَه شُاْنَه |
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وَر مرده لَقَتْ مَاْزَه ای صَاْحِبِ زور و زر |
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اِی قدرت و اِی مِکنَت اَاْخِر از تو وَاْمُاْنَه |
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یَاْ سوزنِ زَه وَر خُوْ یَاْ جِوَاْلدوزَرْ ما |
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تا مِثلِ مُوْ شِی اَاْگا(ه) از آهِ غَریبُاْنَه |
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زرق و برقِ اِی دنیا سِرْ تورْ نِبَرَه از را(ه) |
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جُاْنِ مُوْ دَ شَو گویَنْ دُر مِتَاْبَه پَندُاْنَه |
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اَوسُاْنَة دنیا رَ خیلِ گفتهیَی وَمّا |
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از عروسِ تَاْریفی بَاْسِ دِگَه اَوسُاْنَه |
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انتظارِ خوشْ قولی بیجایِ زِ نَاْمَرْدُ |
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نَاْکَسْ نِمِدَه هرگزْ قولِ مرد و مردُاْنَه |
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از کُاْنَه شُدامْ بیزار، اندیشة نَو دَاْرُم |
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نَو وقتِ به بَاْزار اَ، اَاْزارِ دلِ کُاْنَه |
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از کَوگِ دَ کو گویُمْ، از تِلِکْلِکو گویُم |
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از گفتنِ اِی حرفُوْ خَاْلی نِکُنُم شُاْنَه |
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شِاْرِ نَو مِپِندَاْرَه وَرْ عَرشْ سوار اَاْیَه |
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گَو لَاْغَرِ شِاْرِ نَو، خَو مِبینه پَندُاْنَه |
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شِاْرِ نَویِ نَو اینِ، نشأَه یِ کَنَو اینِ |
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اَاْتِشِ غمِ دلْ رَ اِی شِاْرْ هُسُاْمُاْنَه |
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هر کسِ به کیشِ خُوْ، کوسه فکرِ ریش خُوْ |
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ما خودْ دِلِ ریشِ خو، در گوشه یِ میخُاْنَه |
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اَاْلِ جُلّ و پُلْ خودْ هم، اَاْدَمُاْنِ شُلْ خودْ هم |
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«عندلیب» و گل خودْ هم عینِ شَاْم و پروُاْنَه |
خراسان جنوبی سرزميني است كه ساليان سال در گوشه اي از كشور اسلامي ايران بدون شناخته شدن استعدادها و توانائي هايش قرار داشته و حال كه اين منطقه بصورت استاني مستقل مطرح شده بايد در اعتلاي آن بكوشيم و توانمنديهاي انساني ، فرهنگي ، جغرافيائي ، معدني و غيره را به همگان نشان دهيم .